शुक्रवार, 30 मार्च 2018

चेस_और_ज़िंदगी






आज फिर मैं लेकर आई हूँ अलका श्रीवास्तव आंटी को, जीवन में कुछ बातें बहुत अहमियत रखती हैं, जिनको समझना बहुत ज़रूरी होता है।  यूँ भी कुछ भी जानने समझने के लिए एक अच्छा श्रोता होना ज़रूरी है, और एक अच्छा श्रोता ही जीवन में कुछ अच्छा कह सकता है !


#चेस_और_ज़िंदगी
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"अरे अनुभव! जब देखो तुम लैपटाॅप में ही लगे रहते हो। कभी अपनी माँ से भी बात कर लिया करो।"😈
"माँ मैं ऑनलाइन चेस खेल रहा हूँ। क्या करूँ कोई नहीं है जिसके साथ खेलूँ। मेरे कोई दोस्त चेस खेलना नहीं चाहते।"😡
"ओह! ऐसी बात है। वैसे चेस तो तुमको अच्छे से आता है। फिर तो तुम खूब जीतते होगे?"
"नहीं माँ! मैं चाहे जितनी अच्छी चालें जानता हूँ लेकिन हर बार हार जाता हूँ।"😓😓
"अनु! ऐसा करो चेसबोर्ड ले आओ। देखती हूँ तुम कहाँ गल्ती करते हो?"
"माँ आपको आता है चेस खेलना?😯
"थोड़ा थोड़ा 
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"अरे माँ! आपको तो बहुत अच्छा खेलना आता है। आप तो हर बार जीत रही हैं। मैं हमेशा हार जाता हूँ।" 😧
"जानते हो क्यों?"😌
"क्यों माँ?😬😬
"बेटा! नो डाउट तुम्हारी चालें बहुत अच्छी हैं लेकिन तुम अपनी एक चाल चलने के बाद मेरी चाल नहीं देखते हो कि मैंने कोई मोहरा चला है तो क्यों? तुमको अपनी अगली चाल चलने का इंतजार रहता है। तुम चाहते हो कि कितनी जल्दी मैं अपना मोहरा बढ़ाऊँ और तुम अपनी सोची हुई चाल चल सको" 😒
"ओह माँ! ये सही कह रही हैं आप। मैं वाकई ऐसा ही करता हूँ।"😣
"अनुभव! क्या तुमको पता है हमारी ज़िंदगी में बहुत कुछ चेस की तरह होता है?
"वो कैसे माँ?" 😯
" आज मैं तुमको सिर्फ़ एक उदाहरण दूंगी।
पता है जब हमारे सामने कोई अपनी बात कह रहा होता है तब हम उसकी बात सही से सुनते नहीं बल्कि अपने बोलने का इंतजार कर रहे होते हैं। इस तरह सामने वाले ने क्या कहा और क्यों कहा? दरअसल वो हमें पता ही नहीं होता, क्योंकि हमारा ध्यान उसके बोलने पर नहीं बल्कि, जो हमें बोलना है इस पर होता है।"
"हाँ माँ! जैसे चेस खेलते समय मेरा ध्यान सिर्फ़ अपनी चाल चलने पर होता है। सामने वाले की चाल पर नहीं।" 😉
"बिल्कुल सही पकड़े हो। 😃
दरअसल जब सामने वाला अपनी बात को दृढ़ता से कहता है तो उसकी बात को ध्यान से सुनो। अगर कोई बात विज्ञान से संबंधित है तो देखो उसकी बात में वैज्ञानिक विश्लेषण है या नहीं? कोई बात तार्किक है तो उसके तर्कों को समझने की कोशिश करो। और हाँ अतार्किक बात पर कोई प्रतिक्रिया न दो।
जब तुम किसी की बातों को ध्यान से सुनते हो तो दरअसल तुम उसको दिमाग में स्टोर कर पाते हो। और जो दिमाग में स्टोर होता है वह तुमको याद रहता है। किसी की बात को ध्यान से सुनने पर तुम उसके शब्दों को नहीं उसमें छिपे अर्थ को समझते हो। अगर ज़िंदगी में कुछ सीखना है तो पहले दूसरों को सुनना सीखो। चेस के खेल की तरह धैर्य रखना सीखो। अपने बोलने या अपनी चाल चलने के इंतजार मात्र से तुम कुछ सीखने से और जीतने से वंचित रह जाओगे।"
"माँ! यू आर जीनियस।" 👏👏😍
और बातें बताइए माँ..मैं आपकी बातों को चेस से कोरिलेट कर पा रहा हूँ।" 😊
"आज के लिए इतना ही..😌😌

शुक्रवार, 9 मार्च 2018

तुम्हारा नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाए





मेरी कुनू, मेरी अमु 

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को सार्थक करना 
नौ रस के समिश्रण के साथ जीवन का निर्माण करना। 
प्रथम रश्मि बनना 
रंगिणि बनना 
प्रकृति में जागरण का गीत बनना। 
जब भी उड़ान भरना 
आकाश को छूकर आना 
समंदर की लहरों को पाजेब बनाना। 
चेहरे पर शांत नदी का भाव रखना 
मुश्किलें आयें 
तो गर्जना बनना 
बिजली की तरह चमकना 
बरसना उतना ही 
जिसमें सोंधी सोंधी खुशबू बनी रहे 
और इंद्रधनुष तुम्हारा यश बन जाए 
देश के उन्नत भाल पर 
तुम्हारा नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाए 
कात्या, ...... अमाया 

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

वक़्त, तुम और मैं ...




वक़्त भागता है
और मैं उसके पीछे
कुनू ... अमु करते हुए
दौड़ती हूँ .
... अम्मू नानी पास
... आ जाओ कुनू
हाथ बढ़ाकर अमु ठुनकती है
अच्छा अच्छा तुम आ जाओ अमु
...
फिर दोनों को कहती हूँ
मैं बाहुबली नहीं हूँ
जाओ किसी को नहीं लेंगे ...
यह बात नहीं स्वीकारते हुए भी
मान लेती हैं दोनों
निःसन्देह यह विश्वास है
कि जाऊँगी कहाँ उनकी पकड़ से
और कितनी देर !

वक़्त को
उगते सूरज को
पक्षियों के गान को
धरती की हरियाली को
विस्तृत आकाश को
अपनी अपनी मुट्ठी में थामे
इन दोनों की दिनचर्या शुरू होती है
इनकी मीठी हँसी के दाने
मेरी ऊर्जा
और इनका  शोर  ...
अरे भाई,
बिना रोये गाये,
हठ किये
बचपन कहाँ गुजरता है !

इनकी ज़िद अपनी जगह
हम भी तो
इस बेफिक्र किलकारी में 
रंगों की पहचान कराना
नहीं भूलते
क से
A फॉर
10 तक की गिनती
छोटी छोटी कवितायेँ
कहानियाँ
प्रार्थना के बोल सिखा ही लेते हैं ।

इन्हें जिस तरह अपना खिलौना याद रहता है
अपनी शैतानियाँ याद होती हैं
ठीक उसी तरह
हम याद रखते हैं -
बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं
जैसा आकार दो  ... "

भागते वक़्त के साथ
कुनू अमु भागती है
उसी वक़्त के साथ
मैं भी दौड़ लगा लेती हूँ
ताकि परम्पराओं की छोटी सी घुट्टी ही सही
इन्हें पिला सकूँ
...

शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

अलका श्रीवास्तव आंटी की बातों को ध्यान से पढ़ना






#अपने_नन्हें_दोस्तों_से_कुछ_बातें 
अलका श्रीवास्तव जी की 

बच्चों आज मदर्स डे नहीं है तो क्या हुआ? माँ के लिए कुछ लिखना हो तो हर दिन लिख सकते हैं। आज भी कल भी और चाहें तो मदर्स डे वाले दिन भी। 

खैर आज मैं आप सब नन्हें दोस्तों से सीधे बात करना चाहती हूँ। उनको आज चंपकवन की कहानी नहीं सुनाऊंगी बल्कि आज मैं मिलवाऊंगी अपने चंपकवन के दोस्तों की मम्मियों से..
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🐘 गज्जू को तो सभी जानते होंगे..वो दो साल का हाथी का बच्चा है। जैसे आपकी मम्मी, आपको, पापा की डाँट से बचाती हैं, वैसे ही  गज्जू की मम्मी भी उसके पापा से उसे बचाती हैं । उसके पापा से उसकी सुरक्षा करती हैं।
 
क्या आपको पता है.. हाथियों के झुंड मे कोई भी मेल हाथी दूसरे मेल हाथी को बर्दाश्त नहीं कर सकते। फिर चाहे वो उनका बेटा ही क्यों न हो। ऐसे में किसी भी मेल शिशु का जन्म होने पर उसकी मां उसकी हिफाज़त करती है और दूसरी मम्मी हथनियाँ उसका साथ देती हैं ताकि पापा हाथी,  बच्चे को कोई नुकसान न पहुँचा पाए। 

🐟 ये है मिष्ठी। इसकी एक मौसी हैं #माउथ_ब्रूडर...जो गहरे समुद्र में रहती हैं। एक बार छुट्टियों में मिष्ठी अपनी मौसी के पास गयी। वहाँ उसे बहुत मजा आया। वो अपनी मौसी माउथ ब्रूडर के बच्चों के साथ मौसी के गले के आस पास घूमती रहती थी और जैसे ही सामने से कोई खतरा आता था मौसी सब बच्चों को अपने मुँह में छिपा लेती थी। और जब खतरा टल जाता तो मिष्ठी और मौसी के बच्चे मुँह से बाहर आ जाते थे। और फिर उनका ऊधम चालू हो जाता था। इस तरह मौसी माँ अपने बच्चों की हिफ़ाजत करती हैं। 

🐒मीकू बंदर की एक बुआ हैं #बबून। वो अपने बच्चों को इस तरह सजाती संवारती हैं मानो बच्चों को गाड़ी में बैठकर स्कूल जाना हो। बबून बुआ अपनी उंगलियों से बच्चों के शरीर के एक एक भाग की सफाई करती हैं और बच्चों के शरीर में चिपके कीड़े और मृत त्वचा को खाती जाती हैं। जबसे मीकू की मम्मी बबून बुआ के पास से होकर आई हैं तबसे वो भी कभी कभी मीकू की ऐसी ही सफाई करती हैं।

चंपकवन के पास सुंदरवन में पक्षियों की एक जाति रहती है राजहंस..🐣बेबी राजहंस की 🐤मम्मियाँ भी अपने बच्चों की सफाई बहुत अच्छे से करती हैं। मम्मी राजहंस अपनी चोंच से बेबी राजहंस के शरीर पर जमी धूल हटाती हैं और साथ ही उसके पंखों पर प्राकृतिक तेल की एक परत भी लगा देती है। आप सोच रहे होंगे कि मम्मी राजहंस के पास ये तेल कहाँ से आया? 
दरअसल मम्मी राजहंस के शरीर में तेल ग्रन्थियाँ होती हैं जिससे तेल निकालकर वो बेबी राजहंस के पंखों पर लगा देती हैं। इससे बेबी राजहंस के पंखों पर पानी का असर नहीं होता है।

ये तो आप सभी जानते हो कि 🐹 किटी की 🐱मम्मी के नाखून और दाँत बहुत पैने हैं। जिनसे वो किसी भी जानवार को पछाड़ सकती हैं। जब किटी बहुत छोटी थी और उसने चलना नहीं सीखा था तब उसकी मम्मी अपने दाँतों से उसको एक जगह से दूसरी जगह ले जाती थीं लेकिन मजाल है जो एक भी दाँत किटी की मुलायम त्वचा को जरा भी नुकसान पंहुचा पाता।

इसी तरह 🐯 शेरू की मम्मी दिखने में बहुत  खतरनाक हैं लेकिन वो भी शेरू को बहुत ही सावधानी से मुँह से पकड़ कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाती थीं। 

ये सभी मम्मियाँ अपने बच्चों को बहुत प्यार करती हैं उनका बहुत अच्छे से ख्याल रखती हैं। 

लेकिन बच्चे उनकी भलमनसाहत का फायदा नहीं उठा सकते हैं। जैसे आप बच्चों की मम्मियाँ आपसे कोई गल्ती होने पर आपको कूट पीट देती हैं। ठीक वैसे ही शेरू की मम्मी शेरू की शरारत पर उसे मुँह से उठाकर धीमे से जमीन पर पटक देती हैं। शेरू समझ जाता है कि उसकी मम्मी नाराज हैं। और ऐसे में शेरू उन्हें मनाने और माफी माँगने के लिए उनसे  लिपट जाता है और जैसे आपकी मम्मी आपके sorry बोलने पर आपको माफ कर देती हैं वैसे ही शेरू की मम्मी भी उसे माफ कर देती है। आखिर वो भी एक माँ ही तो है। 

बच्चों इस तरह आपने देखा कि चंपकवन के जानवरों की मम्मियाँ अपने बच्चों का कितना ख्याल रखती हैं। बिल्कुल आपकी मम्मी की तरह। आपकी मम्मी भी तो आपको बहुत प्यार करती हैं न? हाँ शैतानी करने पर डाँट भी देती होंगी? और कभी कभी आपसे नाराज भी हो जाती हैं? 
कोई बात नहीं आप उनको साॅरी बोल दिया करो। देखना वो झट से मान जाएँगी।
चलो फटाफट अपनी मम्मी को #आई_लव_यू बोलो ❤❤

(बच्चे ही क्यों आप बड़े भी (बिना संकोच)अपनी मम्मी  को आई लव यू बोल सकते हैं। उनको अच्छा लगेगा....

 अल्का श्रीवास्तव

सोमवार, 22 जनवरी 2018

मीठी बातों से कभी मत बचना




मीठी बातों से कभी मत बचना 
मीठी बातें जब नश्तर बन चुभती हैं 
तभी 
अनुभव के 
आत्ममंथन के 
दरवाज़े खुलते हैं !
और 
जब तक वे दरवाज़े नहीं खुलते 
तुम जो जीते हो 
वह बस एक बचकाना खेल है !
बचपन को पास रखो 
लेकिन हाँ
बचपना मत दिखाओ 
... 
निःसंदेह,
मीठी बातें मन को सहलाती हैं 
लोरी सी लगती हैं
पर
अजीबोगरीब हालात वहीं से बनते हैं 
मीठी बातें हद से अधिक हो
तो जीने का सही सलीका नहीं आता
सिर्फ मीठा खाओ
तो दांत सड़ जाते हैं 
तालमेल बहुत ज़रूरी है
सीखने के लिए
कुछ बनने के लिए
तीखे बोल रामबाण होते हैं
मुमकिन है 
आज बुरा लगे
लेकिन समय के साथ 
उसकी बारीकियाँ मुस्कान दे जाती हैं 
  

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

आओ सीखें जीवन आओ खेलें जीवन




आओ सीखें जीवन 
आओ खेलें जीवन 
लक्ष्य साधें जीवन का 
कर्म करें जीवन का 
... 
पानी है जीवन
प्रकृति का रोम रोम है जीवन 
ब्रह्ममुहूर्त में उठकर
 पाओ सुंदर जीवन 
समय से सो जाओ और जानो 
कैसे बनता जीवन 
... 
बड़ों का करना सम्मान
झुककर उनके छूना पाँव 
उनके कहे को मान के चलना 
होगा बेहतर जीवन
... 
बात बात में रोना 
नहीं जीवन का सही अर्थ है
बेबात कहीं पे हंसने लगना
नहीं जीवन का सही रूप है
... 
अटलता  है जीवन 
बहना है जीवन 
जीवन है खुशबू से भरना 
और भर जाना 
अपने रोम रोम को साधना 
.....
ठोकर लगे तो डर मत जाना
यूँ ही चलना सिखाता है जीवन
नहीं घबराना बन्द रास्तों से
आत्मविश्वास और धैर्य से
उन्हें खोलना सिखाता है जीवन ...

आओ सीखें जीवन 
आओ खेलें जीवन 

गुरुवार, 23 नवंबर 2017

सुनो कुनू अमु सुनो




कुनू कुनू अमु अमु
तुम हो मेरी जान
मैं तुमपे कुर्बान ...
तितली सी जब उड़ती हो
मैं भी बन जाती हूँ तितली
जंगल के राजा को पकड़ के
देखो लाती है नानी दादी
हाथी कहता है
कहाँ है कुनू
बोलो कहाँ है अमु
बिठाओ उनको मेरी पीठ पे
सैर कराऊँ
उनकी शान बढाऊँ
इनदोनों परियों को खूब घुमाउँ  ...
चालाक लोमड़ी
भागके छुप जाती है
समझ गई है
कुनू अमु के आगे
नहीं चलेगी उसकी चालाकी
कोयल सुनाती है मीठे मीठे गीत
कहती है ये दोनों मेरी सहेली !
तुमदोनों जब मुझसे लिपट लिपटकर
मुझको बुलाती हो
मेरी आँखें
खुशी के मारे
ध्रुवतारा बन जाती हैं
ओ मेरी कुनू
ओ मेरी अमु
तुझपे कुर्बान
है मेरी जान :)