गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

समय की तेजी भी कमाल की है




समय की तेजी भी कमाल की है 
अभी अभी हुई कुनू 
12 फरवरी को 
हो जाएगी पूरे 1 साल की 
और पीछे पीछे मटकती ये अमू 
यानि इस मंच की जुनू 
22 फरवरी को 
7 महीने की  ... 

दोनों की मासूम हँसी 
देती है हमें धोखा 
कि 
"यकीन करो,
हम कुछ नहीं समझते"
लेकिन पलक झपकते 
कुनू होती है किचेन में 
अमू ज़मीन पर 
अपनी अपनी खुराफातों संग 

खिलौने बच्चों के लिए होते हैं 
तो इनके लिए भी 
इनके आस-पास बैठे रहते हैं 
टेडी - मिक्की - टाइगर :)
पर खिलौना बन जाता है हमेशा 
एक कागज़ का टुकड़ा 
मोबाइल 
लैपटॉप 
आटा 
चप्पल  ... 
और ऐसी ही चीजें 

नहीं लुभाता इनको 
खिलौने में मोबाइल 
या बेकार हो गई मोबाइल 
इन्हें चाहिए होता है 
वही सबकुछ 
जो हम लिए होते हैं 
खाना भी हमारा ही अच्छा लगता है 

हप हप करते 
गुर्राते 
खिलखिलाते 
कुनू खड़ी होने लगी है 
अमू घुटने पर खुद को साधने लगी है 
समय हर पल एक नया करिश्मा दे जाता है 

करिश्मा चलता रहे,
......... 
12 को कहना ना भूलें 
कुनू हैप्पी बर्थडे :)

बुधवार, 18 जनवरी 2017

कुनू है जुनू है ... अब और क्या है सरगम :)




जानती हो कुनू जुनू - जुनू यानी अमू
नानी/दादी बनते ही बिना संगीत शिक्षा के मुझे सात सुर मिल गए
 जिसके लिए गीत की पंक्तियाँ गूंजती हैं,
"बड़ा ज़ोर है सात सुरों में,बहते आँसू जाते थम  ..."
तुमलोगों के चेहरे से शबनम टपकती है
मेरे तपते दिल को सुकून मिलता है :)
 अब और क्या है सरगम !

कितनी भी थकान हो
छुप्पाछुप्पी तुमदोनों के संग खेलना
जलतरंग सी खिलखिलाहट में भीगना
पूरी ताज़गी दे जाती है।
मुझे एहसास होता है
मैं कोई जादू की गुड़िया हूँ
थोड़ा झूमकर
थोड़ा मटककर
मैं हर ख़ुशियाँ ला सकती हूँ
टिप टिप टिप टिप आँखों को मटकाकर
तुम्हारे लिए कह सकती हूँ
"खुल जा सिम सिम "
तुम देखना मेरे प्यार का कमाल
यकीनन,
एक दिन खुल जायगी वह गुफा
उसमें से हीरे जवाहरातों की कौन कहे
निकलेगी सिन्ड्रेला
जिनी
अलादीन का चिराग होगा तुम्हारे पास
चाँदनी तुम्हारा स्नान करेगी
चाँद की माँ देगी मंतर निराला
काबुलीवाला आएगा पिस्ता बादाम लेकर
 बस बेटा
 इन सबको याद रखना
भूलने से सबको दुःख होता है
ऐसी तकलीफ किसी को मत देना
सिंड्रेला सा मन रखना

......... बोलो हाँ :)

गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

कुनू जुनू ..... गुटुक !




ये बनाया मैंने बांहों का घेरा
दुआओं का घेरा
खिलखिलाती नदियों की कलकल का घेरा
मींच ली हैं मैंने अपनी आँखें
कुछ नहीं दिख रहा
कौन आया कौन आया
अले ये तो मेली ज़िन्दगी है ...

ये है रोटी , ये है दाल
ये है सब्जी और मुर्गे की टांग
साथ में मस्त गाजर का हलवा
बन गया कौर
मींच ली हैं आँखें
कौन खाया कौन खाया
बोलो बोलो

नहीं आई हँसी
तो करते हैं अट्टा पट्टा
हाथ बढ़ाओ .....
ये रही गुदगुदी
कौन हँसा कौन हँसा
बोलो बोलो बोलो बोलो
जल्दी बोलो
मींच ली हैं आँखें मैंने
गले लग जाओ मेरे
और ये कौर हुआ - गुटुक !

शनिवार, 10 दिसंबर 2016

कुनू जुनू ने सूरज से कहा




सूरज चाचू 
तुम्हें ठंड नहीं लगती क्या ?
इतना घना कुहरा 
कोहरे में तुम 
कोई गर्म कपड़ा 
क्यूँ नहीं पहन लेते ?
तुम्हारी मम्मा 
तुम्हें नहीं समझाती क्या ?
कम से कम इन कोहरों को डाँटे 
"अरे, भागो यहाँ से" 
... 
बैठो न सूरज चाचू हमारे पास 
दूध 
एज घूँट चाय 
एक टुकड़ा रोटी का देंगे हम 
अपने खिलौनों से खेलने देंगे हम 
अपना कम्बल भी उढ़ायेंगे 
... 
एक बात बताओ 
तुम कभी थकते नहीं क्या ?
निकलते हो,
अस्त होते हो 
फिर कहीं और निकल जाते हो 
आओ,
ज़रा सा आराम कर लो 
हमारे संग हाथ मिलाओ 
छुप्पाछुप्पी खेलो 
हमारे हिस्से की लोरी सुनके 
गहरी नींद सो जाओ  ... 

शनिवार, 3 दिसंबर 2016

सीधी सी बात है कुनू जुनू




आशीर्वाद कभी व्यर्थ नहीं जाता
भले ही वह बेमन से दिया गया हो
लेकिन वह ले लेता है ॐ की आकृति
जीवन के हर कदम पर
करता है शंखनाद
और अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाता है  ...
इसलिए चरण छूना
हाथ जोड़ना
अपने संस्कारों की तिजोरी में रखना
सामनेवाला क्या है
इससे अपने को प्रभावित मत करना  ...

पूर्व से उदित सूर्य
पश्चिम में अस्त होता है
कोई नमन करे
ना करे
वह अपनी परंपरा नहीं बदलता
ग्रहण हो
या बादलों का घना साया
वह अपनी प्रकृति नहीं बदलता
और इसीमें
उसकी गरिमा है
उसका अस्तित्व है  ...

हमारी प्रकृति
हमारी गरिमा
ईश्वरीय देन है
कोई कीचड़ उछाल दे
तो मन क्षुब्ध होता है
लेकिन अपना स्वभाव
बुद्धि और विवेक का काम करता है  ...

इसका अर्थ यह नहीं
कि तुम कीचड़ को सर माथे लगाओ
हाँ,
उसके मध्य से कमल लाने के लिए
तुम्हें संतुलित क़दमों से ही चलना होगा
....
सीधी सी बात है
कीचड़ तुम्हारे संतुलन से
अपना स्वभाव नहीं बदलता
फिर तुम उसकी वजह से
उसकी श्रेणी में क्यूँ आओ !
तर्क स्वस्थ मानसिकता का प्रतीक है
कुतर्क अस्वस्थ मानसिकता का
तुम्हें तय करना है
तुम स्वस्थ रहना चाहते हो
या व्यर्थ की बातों में समय गँवाकर
स्वस्थ होकर भी खुद को बीमार रखना !!

क्षणांश के लिए
मन की उद्विग्नता स्वाभाविक है
पर अपने "मैं" पर
यानि अपने भीतर की अलौकिक शक्ति पर
ध्यान केंद्रित करना
कुछ समय चुप रह जाना
तुम्हें रास्तों का विकल्प देगा
तुम्हारे हाथों में सही चाभी देकर
तुम्हें सुरक्षित रखेगा।

शनिवार, 26 नवंबर 2016

चलते हुए तुम्हें खुद ब खुद सारे जवाब मिल जाएँगे ...




दोस्त बनाना 
मीठी बोली बोलना 
पर,
गहरी दोस्ती करते हुए याद रखना 
एक दोस्त मिले 
तो तुम खुशनसीब हो 
दो तो बहुत है  ... ... 
... तीसरा कभी मिल ही नहीं सकता !
ना,ना - तर्क मत करना 
कोई प्रश्न नहीं 
चलते हुए 
तुम्हें खुद ब खुद 
सारे जवाब मिल जाएँगे  ... !

बहुत सारे प्रश्नों का कोई जवाब नहीं होता 
होते हैं उनके 
अपने अनुभव 
और तभी व्यक्ति स्वीकार भी करता है 
जीवन का सत्य 
जीवन ही बताता है !

खैर, 
प्रकृति से तुम ज़रूर दोस्ती करना 
उसके पास सौन्दर्य है 
रहस्य है 
प्रतिध्वनियाँ हैं 
पर्वतों की ऊँचाई 
घाटियों का घुमाव 
नदी का अथाह जल 
खाई 
सुरंग 
भिन्न भिन्न वृक्ष 
अद्भुत लतायें 
जिज्ञासु विस्तार  ... 
... 
कौतुहल न हो 
चिड़ियों का सरगम न हो 
तो मन लक्ष्यभेद नहीं कर पाता 
और ज़रूरी है 
कि तुम आत्मसात करो 
हर व्यक्तिविशेष की खूबी 
सीखो परशुराम से 
कुछ राम से 
कुछ विभीषण से 
कुछ शबरी से 
सीता से 
यशोधरा से 
राहुल से 
बुद्ध से 
सीखो तुम भीष्म से 
विदुर से 
अर्जुन से 
कर्ण से 
दुआ है -
मिले तुम्हें संजय की दृष्टि 
तुम देख सको आगत 
जो निर्णय लेने में साथ दे 
... 
सीखने के लिए 
विष और अमृत 
दोनों के असर को समझना 
तभी 
हाँ तभी 
तुम्हें सही दोस्त मिलेगा 
 ... 

मंगलवार, 22 नवंबर 2016

बड़े हो जाओ खूब बड़े हो जाओ पर थोड़ा रुको ... :)




बड़े हो जाओ
खूब बड़े हो जाओ
पर थोड़ा रुको
नन्हें नन्हें फ्रॉक पहन लो अच्छी तरह :)
बड़े हो जाओ
खूब बड़े हो जाओ
पर थोड़ा रुको
ये जो अबोध खिलखिलाहट है
उसे भरपूर जी लो, जीने दो :)
बड़े हो जाओ
खूब बड़े हो जाओ
पर थोड़ा रुको
झां झां अच्छी तरह खेल लो :)
बड़े हो जाओ
खूब बड़े हो जाओ
पर थोड़ा रुको
एक बार स्कूल जाने लगोगे
फिर ये सबक वो सबक
थोड़ा गुस्सा
थोड़ी हिदायतें  ... :)
बड़े हो जाओ
खूब बड़े हो जाओ
पर थोड़ा रुको
अपनी नन्हीं सी दुनिया को
बाहों में समेट लो
एक नन्हीं सी डिबिया में संजो लो
नानी/दादी की कहानियों को
पापा,मम्मा के दुलार को
मामा मौसी बुआ के जादुई चिराग को
सिरहाने रख लो
जब कभी लगे
- कहाँ गया बचपन !
सब निकालना अपनी पिटारी से
फिर एक डायरी बनाना
सब लिखना
ताकि जब बहुत बड़े हो जाओ
तो एक दिन अपने घर की बालकनी में
उसे पढ़ते हुए
थोड़ा थोड़ा बच्चे बन जाना तुम
:)
बड़े हो जाओ
खूब बड़े हो जाओ
पर थोड़ा रुको  ... :)