गुरुवार, 17 नवंबर 2016

कुनू जुनू खेल की "ऊँगली" और पढाई का "हाथ" थाम लेना





मेरी कुनू ,मेरी जुनू 

ज़िन्दगी में बहुत लोगों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है, और सीखने के लिए, उसे मन में उतारने के लिए उम्र की कोई बंदिश नहीं होती।  हर उम्र में एक नया दृष्टिकोण मिलता है, बहुत सी बातें - जो शुरू में मज़ाक लगती हैं, उनकी गंभीरता समय के साथ समझ में आती है। 
कुछ ऐसा ही लिखा है अर्चना आंटी ने  ... ब्लॉग से इनको जाना, फिर फेसबुक ने बहुत कुछ जानने का मौका दिया, और एक दिन ये आंटी मेरे पास आईं,  ... समझ लो, मेरी छोटी बहन हैं।  
इनकी बहुत सी कहानी बाद में, आज तो उनका यह लिखा संजो रही हूँ, ताकि तुम जब पढ़ो तो जानो कि समय एक सा नहीं होता  ... 



"खेल -खेल में" 

आओ तुम्हें बताऊं बात एक आज,
खोलूं अपने दिल का एक राज,
मेरा मन कभी पढाई मे नहीं लगता था,
हमेशा कक्षा की खिडकी से बाहर ही भागता था,
बहुत डरती थी मै पढाई करने से,
और हमेशा बचती थी कक्षा में खडे होकर पढने से,
मुझे हमेशा खेल बहुत भाए है,
लगता था जैसे ये मेरी ही माँ के "जाए" है,
कसकर हमेशा खेलों का पकडा था हाथ,
फ़िर भी न जाने कब? किस मेले मे, छूट गया था साथ,
कभी जब अपने बारे में सोचती हूं ,तो पाती हूं,
कि घर में सबसे बडी हूं, और सबसे ज्यादा पढी हूं,
शायद खेल और पढाई की दोस्ती थी,
और खेल ने ही छुपकर पढाई की उंगली पकड रखी थी,
पढाई मुझे बिना बताए मेरे साथ चलती रही,
और खेल को सामने देख मै खुश होती रही,
मै नहीं जानती थी कि जिन्दगी में कभी ऐसा मोड आएगा,
जहाँ पढाई आगे और खेल पीछे हो जाएगा,
पर बच्चों- हमेशा से ऐसा ही होता आया है,
पढाई ने हमेशा ही खेल को हराया है,
मगर अब समय रहते तुम इस बात को जान लेना,
खेल की "ऊँगली" और पढाई का "हाथ" थाम लेना,
तुम्हारे अन्दर भी बहुत "कुछ" है,
जो तुमने अब तक नहीं पाया है,
शायद ईश्वर ने उसे बहुत ही अन्दर छुपाया है,
तुम्हें यहाँ से आगे जाकर भी उसे ढूंढना है,
बहुत दूर तक चलना है,
दादा की लाठी लेना है,
दादी का हाथ पकड़ना है,
पिता के कंधे का बोझ हल्का करना है,
माँ के सपनों को पूरा करना है,
जीवन की नदिया मे बहकर सागर से जाकर मिलना है,
दुनियाँ के आसमान में रोशनी बनकर चमकना है,
अपना नाम इतिहास के सुनहरे पन्नों पर लिखना है,
यहाँ तक तो सबका साथ था--
अब तुम्हें अकेले ही आगे बढ़ना है,
चाँद पर तो सब जा चुके ,
तुम्हें सूरज के घोडों पर चढना है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. अहा! जितना प्यार लुटाऊँ कम है। .....जियो मेरी बेटोयों तुमसे ही बनी रहेगी दुनिया । ... :-)

    उत्तर देंहटाएं