मंगलवार, 11 जुलाई 2017

वक़्त की पाबंदी का अभ्यास ज़रूरी है



ब्रह्ममुहूर्त
रात्रि का चौथा प्रहर
सूर्योदय से पूर्व का समय
अमृत बेला
सौंदर्य,बल,विद्या,बुद्धि,स्वास्थ्य के लिए
अति उत्तम समय  ...

ब्रह्म अर्थात परमात्मा
वह शक्ति
जो हमें हमारा परिचय देती है
हमारे होने का उद्देश्य बतलाती है
आसुरी विचारों से बचाती है
हवायें संजीवनी बन बहती है
माँ सरस्वती ज्ञान के मंत्र बोलती हैं
पंछियों का मधुर कलरव
मन मस्तिष्क को
जाग्रत करता है
...
सत्य ब्रह्ममुहूर्त में ही
सूर्य की लालिमा लिए
उदित होता है
वेद अपना अस्तित्व बताते हैं
प्रकृति इतनी शांत होती है
कि निःशब्द
ध्वनि प्रतिध्वनि को
हम सुन सकते हैं
आत्मसात कर सकते हैं
...
तो क्यों दुनिया रात भर भाग रही है
इस पर गौर मत करना
समय से खाना
समय से सोना
और समय से
मतलब
ब्रह्ममुहूर्त में उठना !
सूरज तुमसे पहले आ जाए
तो तुम उसका स्वागत कैसे करोगे ?
चिड़िया की पहली चीं चीं
भला कैसे सुनोगे ?
ज़िन्दगी को अर्थ देने के लिए
यह सबक ज़रूरी है
कुछ भी करने के लिए
वक़्त की पाबंदी का
अभ्यास ज़रूरी है
लक्ष्य को पाने के लिए
नियम में बंधना ज़रूरी है  ...

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

आओ पढ़े अ आ इ ई



ये है 'अ' 
अ अ अ 
अ से होता है अनार 
लाल लाल दाने 
मीठे मीठे दाने 
सुबह सुबह खाओ 
स्वस्थ हो जाओ  ... 

आ से आम 
आ आ आ 
मीठे मीठे आम 
गर्मी के मौसम का 
राजा है ये आम 
गुट गुट खाओ 
रसीले हो जाओ  ... 


इ से इमली 
खट्टी मीठी इमली 
सेहत बनाये 
भूख बढाए 
खा लो बनाके 
इमली की चटनी  ... 

ई से ईख 
ईख से बनती है चीनी 
और बनता है गुड़ 
ईख खाओ 
या शरबत पीयो 
पाओगे विटामिन बी और सी  ... 

उ से देखो ये उड़नखटोला 
तुमको घुमायेगा ये उड़नखटोला 
धरती से आकाश तक उड़ेगा 
हाँ हाँ तुम्हारा ये उड़नखटोला  ... 

ऊ ऊ ऊ 
ऊ से आया ऊन 
अम्मा बनाएगी स्वेटर 
सर्दी को दूर भगाएगी 
ऊ ऊ ऊ 
ऊ ऊ ऊ  ... 

ए से एक 
हम बनेंगे एक 
आवाज़ दो हम एक हैं  ... 

ऐ से ये है ऐनक 
आँखों की रौशनी हो कम 
तो काम आए ऐनक  ... 

ओ से देखो ओस की बूँदें 
दूब पे ठिठकी ओस 
ओ ओ ओ  ... 

औ से औरत 
माँ है औरत 
औरत देती जीवन  ... 

अं अं अं 
अं से अंगूर 
खट्टे भी और मीठे भी  ... 

अः अः अः 

शनिवार, 1 जुलाई 2017

एक कवच




कुनू अमू 
ये है अम्मा की ख्वाहिश, उनकी बताई सीख,
जो एक कवच ही है 
आओ, पहनो इसे दृढ़ता के साथ 

तुम्हारे लिए....


सपने देखो तो ज़रूर
समझो सपनों की भाषा
निश्चित तुमको मिलेगी मंजिल
पूरी होगी आशा !
सपने साथ में हैं गर तेरे
तू मजबूर नहीं है
तूफानों से मत घबराना
मंजिल दूर नहीं है !
बड़े पते की बात है प्यारे
घबराकर मत रोना
आग में तपकर ही जो निखरे
है वही सच्चा सोना !
बुरा नहीं होता है प्यारे
आंखों का सपनाना
सपने सच भी होते हैं
यह मैंने भी है जाना !
सपने ही थे साथ सफर में
और तेरा हमसाया
कतरे की अब बात भुला दे
दरिया सामने आया !
नहीं असंभव बात ये कोई
फिर हो नई कहानी
तुम बन जाओ एक और
धीरू भाई अम्बानी !

सरस्वती प्रसाद (अम्मा)